17 अप्रैल 2010

'एक और अमावस'




काटी है रात आज भी,
कल रात की तरह,
निकला न चाँद आज भी,
कल रात की तरह,

जाने कहाँ  छुपा है,
जाने गया किधर,
चला तो था,खबर है,
आया नहीं इधर,
फेरी है नज़र उसने,
मेरे हालात की तरह,

निकला न चाँद आज भी,
कल रात की तरह,

ग्रहण लगा उसे है,
कि फ़लक ने छुपा लिया,
या बादलों ने उसको,
पलक में छुपा लिया,
जो भी हुआ, हुआ है,
किसी करामात की तरह, 

निकला न चाँद आज भी, ,
कल रात की तरह,

मुमकिन है चाँदनी ये
न मेरे वास्ते हो,
जुदा मेरे आस्मां से,
अब उसके रास्ते हों,
है दर्द ये कबूल,
किसी सौगात की तरह,
निकला न चाँद आज भी,
कल रात की तरह
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सुना है उसने अब तो
न आने की कसम खाई 
हमने भी हार कर
नज़र में चांदनी उगाई 
दिल का आसमां सजा
बारात की तरह 
निकले न चाँद चाहे अब  
हर रात की तरह 


- योगेश शर्मा