05 मई 2010

'माफ़ मैंने कर दिया'


इतना गुमसुम हो गया था,
जैसे के बेहोश हूँ,
खामोशियाँ भी पूछती थीं,
इतना क्यों खामोश हूँ,


कर रहा था साफ़ बस,
मन की सारी मैल को,
मशगूल भूलने में था,
हर इक पुराने बैर को


नाग ढेरों बरसों से,
दिल में थे पाले हुए,
रंज के बेताल कितने,
ख़ुद पे थे डाले हुए,


भूत ये करते थे पीछा,
दिन रात सोते जागते,
जिंदगी बरबाद कर ली,
इनसे बचते भागते,


जिंदगी से, जालों को
अब साफ़ मैंने कर दिया,
साथ सबके ख़ुद को भी,
अब माफ़ मैंने कर दिया |

- योगेश शर्मा