06 मई 2010

'क्या इलज़ाम दें शैतान को'













दुनिया के मिट जाने का क्या,
इलज़ाम दें शैतान को,
जब ख़त्म करने में लगा,
इंसान ही इंसान को,

हर तरफ बस शोर है,
मातम है, छाया है धुआं,
कितनी जल्दी है पड़ी,
मरने की हर इंसान को,

भूख,  महेंगाई, तरक्की ,
हवस दौलत और नशा,
जरूरतें पैदा करी ख़ुद,
दोष दें भगवान को,

ख्वाहिशों के सब्ज़ जंगल,
रह जायेंगे पीछें यही,
जेब तक न होगी, कफ़न में,
पहुंचेंगे जब अंजाम को |

-  योगेश शर्मा