06 जून 2010

'ये हौसले कभी कम न हों'



वक्त के चलने का सारा खेल है जब ज़िन्दगी ,
कैसे ये हो जाए कि फिर खुशियाँ हों पर गम न हों,

ज्यादा क्या मांगू मैं तुझसे, तूने ख़ुदा सब है दिया
इतना कर एहसान बस ये हौसले कभी कम न हों

उम्र साँसों की बड़े, ये कभी ख्वाहिश न की,
दर्द जितना चाहे दे दे,मुस्कुराहट कम न हों

आंसू तो मनमौजी ठहरें खुशियों में भी बहते हैं,
इतना कर, कि मुश्किलों में आँख मेरी नम न हो

जीत की खुशियाँ, मेरी तकदीर में हों या न हों ,
गलतियों का सोग न हो, हार का मातम न हो

ज्यादा क्या मांगू मैं तुझसे, तूने ख़ुदा सब है दिया
इतना कर एहसान बस ये हौसले कभी कम न हों,


- योगेश शर्मा