08 जून 2010

पंछी तुम क्यों गाते





पंछी तुम क्यों गाते  


गीत लिख रहा वियोग बिछोह का,
और छेड़ रहा हूँ,राग विरह का
इस अवसाद से मुझे छुड़ाने, बार बार क्यों आते  
पंछी तुम क्यों गाते  

 न सुनना है मुझको कोई प्यारा मधुर तराना
कोई विचार जो सुख पहुंचाए,नहीं है मुझको लाना
अनुभूति क्यों प्रेम की नाहक, मेरे मन में जगाते 
पंछी तुम क्यों गाते   

 
 उपवन को तू छोड़ के क्यों, मेरी खिड़की पर आये
छोटे छोटे पर लहरा, गर्दन मटकाता जाए
कितना ही चाहा ना देखूं, नैना तुम पर जाते 
पंछी तुम क्यों गाते  

 
चाहे कितनी आँख है फेरी, ध्यान हटाया जितना
 हाथों से भी कानो को, बन्द करा है कितना
किन्तु स्वर सन्देश तुम्हारे सीधे दिल तक आते 
पंछी तुम क्यों गाते  

 
सोचता हूँ अब क्यों नाहक ही झूठे दर्द को ओढूं
ह्रदय खिला है जब उपवन सा कांटे क्यों मैं जोडूं
जान गया हूँ रहस्य कि मुझको थे यह बात बताते 
पंछी गाते गाते  


- योगेश शर्मा