13 जुलाई 2010

'मंजिले दिखती हैं मुझको'



मंजिले  दिखती हैं मुझको  सिर्फ  तेरे  साथ  में
मेरी  किस्मत की लकीरें कैद तेरे हाथ  में

मेरे इरादों को हवा दो, चाहे पानी फेर दो
दोनों बातों से लगेगी आग़, इन ज़ज्बात में

मिले गये तुम तो संभालेंगे बची हर सांस  को
वरना खर्चेंगे यूँ जैसे मिली हो खैरात  में


इश्क की किस्मत में कितने और अफ़साने बचे  
वक़्त  क्यूं ज़ाया करें बेकार सवालात  में


चारागर ऐसे बनो मत मर्ज़ पढ़ ले जो सभी
ख़ुदा होने का होता है भरम इन हालात में


- योगेश शर्मा