02 फ़रवरी 2011

'मैं ही मैं'

 
 

मैं से शुरू सारे सवाल,
मैं में छुपे सारे जवाब,
मैं कभी दुनिया से बेहतर,
मैं कभी सबसे ख़राब,

मैं की है अपनी रवानी ,
मैं  उम्र भर का नकाब,
मैं पुलिंदा ख़ामियों का,
मैं फिर भी सबसे लाजवाब,

मैं परेशानी का सबब,
मैं गुनाहों की वजह,
मैं से जुड़े गम सैकड़ो हैं,
मैं तब भी दे कितना मज़ा,

मैं कभी पहुंचे फ़लक पर  ,
मैं कभी पल भर में चूर
मैं कभी हैवान बनता ,
मैं कभी ईमां का नूर ,

मैं हैरानियों में घिरा,
मैं में है कितना गुरूर,
मैं कभी अपनी ही ताकत,
मैं कभी अपनों से दूर,

मैं कभी जीने का मातम,
मैं कभी मरने का डर,
मैं से है सारी ख़ुशी,
मैं जहाँ से बेखबर,

मैं ही मय, मयखाना मैं,
मैं ही साकी, मैं गिलास
डूबते मैं के भंवर में,
लेकिन बुझे ना, मैं की प्यास |



- योगेश शर्मा