17 अप्रैल 2011

क्यों...क्यों...क्यों



बंद क्यों, दरवाज़े दिलों के
बस खुली हैं खिड़कियाँ,
झांकना औरों के घर में,
क्यों बनीं कमजोरियां ?

खोखले रिश्तों के अपने,
खोल में लिपटे हुए,
नापकर होते हैं खुश क्यों,
लोगों के दिल की दूरियां,

क्या किया, किसने किया,
हर बात का रखा हिसाब,
याद के खातों से ग़ुम क्यों,
अपनी ही नादानियाँ,

छोड़ हल्की- फुल्की खुशियाँ,
अब ढूँढ़ते हैं सनसनी,
दिल को क्यों छूती नहीं,
सच्ची सीधी कहानियां,

हरियाली को बदला शहर में,
तरक्की से इतना था प्यार,
फिर लौटते हैं जंगलों में,
क्यों हम मनाने छुट्टियाँ,

एक तरफ तो भागते हैं,
पकड़ने, आने वाला कल,
पुरानी तस्वीरों से मांगें,
क्यों बीती जिंदगानियां,

खौफ में, उस वक्त के,
जो अभी आया नहीं,
गुज़रते नन्हे पलों की
देते क्यों कुर्बानियां ???




- योगेश शर्मा