23 जुलाई 2011

'मैं हूँ बस ख़याल'


न उठा कोई कसम न कोई वायदा कर
न सही गलत का हमदम कोई  फैसला कर
साँसों में भर ले मुझको और छोड़ता जा  
मैं हूँ बस ख़याल मुझे सोचता जा 

बना बोझ मुझको न यादों में ढोना
न पाने को मुझको नींदे ही खोना
खुली आँख का हूँ एक ख्वाब देखता जा
मैं हूँ बस ख़याल मुझे सोचता जा

बेकार क्यों बनाना मुझे माज़ी का हिस्सा
है आज ही हकीकत वो कल सिर्फ किस्सा
राह - ऐ-  दिल के सारे नक्श पोंछता जा
मैं हूँ बस ख़याल मुझे सोचता जा

यकीं रास्तों पे,  नज़र मंजिलों पर 
भर आँख में सितारे, सूरज को ज़मीं कर 
कहीं तोड़ ले और कहीं जोड़ता जा
मैं हूँ बस ख़याल मुझे सोचता जा

मैं हूँ बस ख़याल मुझे सोचता जा..............



- योगेश शर्मा