08 अक्तूबर 2011

'तुम न मिल पाए'


तुम न मिल पाए तो भी क्या ग़म है 
दिल में हो बात ये क्या कम है 

कभी है अक्स तेरा और कभी तेरे ख्वाब 
चेहरे पर एक चमक सी हरदम है

है तेरी याद की ये सरगोशी 
वैसे खामोशियों का मौसम है 

न अपना दोस्त अब, न हूँ दुश्मन 
खुद से इक बेरुखी का आलम है 

हर खुशी क्यों ख़ता सी लगती है
बस इसी बात का तो मातम है

अभी उलटे हैं दास्ताँ के कुछ पन्ने
आँख मेरी अभी से क्यों नम है



- योगेश शर्मा