17 अक्तूबर 2011

'तक़दीर का बादल'



ये जो
तक़दीर का बादल है 
मनमौजी है,
कभी उड़ जाए
कभी ख़ुल के
बरस जाता है

यूं तो शादाब
कई गुंचे हुए हैं
दिल के,
सूखे पत्तों पर
जाने क्यों
तरस आता है





-योगेश शर्मा