05 जून 2012

'बहुत दिनों से लब नहीं खोले'



बहुत दिनों से लब नहीं खोले  
नज़र  में सब पयाम रखता हूँ 
भूल बैठा हूँ सारी परवाज़ें  
खूद को मुटठी में थाम रखता हूँ 

न कोई शौक न कोई चाहत 
रहे  न सपने, है यही राहत  
हसरतें सब नाक़ाम रखता हूँ 

ख़ुद से शिक्वे, कई गुज़री यादें 
रूठे रिश्ते , थोड़े टूटे वादे 
बोझ दिल पे तमाम रखता हूँ 

ख्वाब सा है किसी का घर आना 
ऐसे सीखा है दिल को बहलाना  
आहटों के ही नाम रखता हूँ 

खेलता हूँ ये मौत से, या फिर
कहीं जीने से लग रहा है डर
अपने सर पर इनाम रखता हूँ 

बहुत दिनों से लब नहीं खोले  
नज़र  में सब पयाम रखता हूँ 



- योगेश शर्मा