"बे - तकल्लुफ़"
""गलतियों की तल्खियां.... तल्खियों पे चुस्कियां""
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16 मई 2026
'जाने उसी से क्यों मैं'
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तमाम उम्र मुझसे जो बा-वफ़ा रहा जाने उसी से क्यों मैं ख़फ़ा ख़फ़ा रहा ऐसा हुआ है यूं ही किसी एक बात पर नाराज़ उससे अक्सर लाखों दफ़ा रहा वक़्त कितना ...
09 मई 2026
'ख़ामोशियों की सरगम'
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कभी राग छेड़ते हैं हँसते हुए से मौसम मधुर कभी है लगती ख़ामोशियों की सरगम नहीं ढूंढता है तब दिल कोई दोस्त कोई अपना ऐसे में बस भला सा लगता है...
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01 मई 2026
'लहू है ये '
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उसे किसी की फ़िक्र नहीं कहीं पे उसका ज़िक्र नहीं किसी ने उस को सुना नहीं किसी नज़र ने पढ़ा नहीं हदों में अपनी बंधा बंधा सा रग़ों में ऐसे छुपा हुआ...
27 अगस्त 2025
" उसे खोजता था''
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उसे खोजता था बड़ी मुद्दतों से कहीं ढूंढता था उसे बस्तियों में मंज़िलों पे रास्तों में सेहरा समंदर वादियों में कभी झलकता था वो नज़र में म...
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15 जून 2025
'सौ झूठ गढ़े'
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सौ झूठ गढ़े जीने के लिए फिर सच उनको ही मान लिया हर लम्हा कुछ मारा ख़ुद को और उसको जीना मान लिया ख़्वाहिश ख़्वाब तमन्ना ज़िद कुछ पता नहीं क्या प...
'भीड़ में जीते रहे'
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भीड़ में जीते रहे और अकेले मर गए न ग़लत थे न सही बस सफर तय कर गए ज़िन्दगी भी शोर-ओ-ग़ुल का कैसा अजब बाज़ार है हर कोई चिल्ला रहा बस शोर का व्याप...
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25 मई 2025
"माफ़ कर दो"
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चलो इस तरह सब हिसाब साफ़ कर दो मैं तुमको माफ़ कर दूँ तुम मुझ को माफ़ कर दो मन से मिटा दीं मैंने नादानियाँ तुम्हारी गलतियां मेरी भी तुम दिल से स...
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11 दिसंबर 2023
'ज़िन्दगी हमेशा'
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कितने नए करिश्में हर पल दिखा रही है ज़िन्दगी हमेशा चलना सिखा रही है कब जीत को मनाना कब हार में चुप रहना कब रुक के साँस लेना कब तोड़ हदें ...
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20 सितंबर 2023
'नश्तर'
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दर्द - ए - दिल में कमी न रहने दो दिल में नश्तर गड़ा ही रहने दो लम्हें बेरंग थे अब थोड़ा रंग आया है ये लहू बह रहा है बहने दो बनके रह जाएगा चिड़ि...
10 जून 2023
'मेरी कहानी बाकी है'
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कुछ मोड़ बचे हैं किस्सों में कोई बात पुरानी बाकी है दुनिया के फ़सानों में अब भी कहीं मेरी कहानी बाकी है कुछ ख्वाब बचे हैं आँखों में कुछ क़र्ज़ द...
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