"बे - तकल्लुफ़"
""गलतियों की तल्खियां.... तल्खियों पे चुस्कियां""
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'इन्तेहा'
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28 अप्रैल 2010
'इन्तेहा'
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गया जो छोड़ के, तो बदनसीबी उसकी है बहुत हैं राहों में पड़े, नज़र बिछाये हुए उसे तो हमारी, बहुत जरूरत थी, हम ही बिछड़ने की, हसरत थे छुपा...
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