"बे - तकल्लुफ़"
""गलतियों की तल्खियां.... तल्खियों पे चुस्कियां""
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01 मई 2010
'दर्द, तू परेशां क्यों है'
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थोड़ा नाराज़ सा, थोड़ा हैरां क्यों है? दर्द, तू मुझे देख के परेशां क्यों है? इक रोज़ दबे पाँव तू ज़िन्दगी में आया, हौले से मेरी...
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