"बे - तकल्लुफ़"
""गलतियों की तल्खियां.... तल्खियों पे चुस्कियां""
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आज भी जिंदा हूँ मैं
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17 जून 2010
'आज भी जिंदा हूँ मैं'
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ज़िंदगी ने लाख चाहा सूख जाए खून मेरा रूह आँखे मूँद सोये और ज़मीर हो जाए बहरा मुझको भी लगता था डर, ये कहीं सच ...
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