"बे - तकल्लुफ़"
""गलतियों की तल्खियां.... तल्खियों पे चुस्कियां""
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कर चले जो फ़िदा
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कर चले जो फ़िदा
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14 जून 2010
'कर चले जो फ़िदा'
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कैफ़ी साहब को नमन करते हुए यह रचना लिख रहा हूँ | काश, सिपाही का वो जज़्बा, जो उनके गीत में है, वो हमारे दिलों में भी जागे | कर चले जो फ़ि...
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