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27 फ़रवरी 2011

'यहाँ कोई नहीं रहता'



सितारों की चमक धुंधली 
चरागों की तपिश कम कम
ये साँसे हांफती सी  हैं
मगर दिल की सदा  मद्धम
बस इक धड़कन सी कहती है  
यहाँ कोई नहीं रहता

महलों में हैं सन्नाटे 
सभी दरबार हैं खाली
पड़े हैं रास्ते वीरां 
सब बाज़ार हैं खाली
कहीं कुछ घर से ढाँचे हैं
जहां कोई नहीं रहता

तूफां  सीने का, अपने  
किनारे तोड़ बैठा है
आँखों का  समंदर भी
नमक सब छोड़ बैठा है
वफायें क्यों वहाँ ठहरें 
जहां कोई नहीं रहता  

जो चाहा क़त्ल अब करना
तो बाहों में समेटा है
फिर दस्त ए खंजर को
अश्कों में लपेटा है  
पानी पर तो हाथों का 
निशां कोई नहीं रहता

ज़हरीली दुआओं ने
हवा को गर्क कर डाला
उगाकर आसमान इसमें
ज़मीं को नर्क कर डाला
है अब सूरज को हथियाना
वहाँ कोई नहीं रहता

बस इक धड़कन सी कहती है
यहाँ कोई नहीं रहता


- योगेश शर्मा