सुना है ग़म जब हद से गुज़र जायेगा
हर दर्द दूर करने एक मसीहा आयेगा
उसके है इंतज़ार में कबसे ये क़ायनात
सदियाँ गुज़र गयी न हुयी कोई करामात
झूठी उम्मीद ये एक दिन टूट जाएगी
आसमां से हट कर ख़ुद पे नज़र जायेगी
जानेंगे हम पहल करनी ही होगी तन्हा
कोई नहीं ख़ुद हम हैं अपने ही मसीहा
आएंगे हाथ आगे फिर बांटने हर बोझ
उठेंगे हर तरफ नए मसीहा हर रोज़
मायूसियां मिटेंगी ख़त्म अंधेरा होगा
दौर आयेगा जब हर शख्स मसीहा होगा |
- योगेश शर्मा
