फिर हैं खामोश हम, सांस रोके सन्नाटे है
मुलाकातों के दौर चुप्पियों में काटे है
शुरु करो कोई बात, तो कोई बात बने
आग सा तपता सफ़र, चांदनी रात बने
कोई कसम ही उठाओ, झूठे वादे ही करो
कोई शिकवा न सही, सर्द आहें ही भरो
लब ही खोलो कि बातों के हालात बने
आग सा तपता सफ़र चांदनी रात बने
डर कहीं मुझको भी है तुम भी शर्माते हो
मैं कहीं ख़ुद से और तुम मुझसे घबराते हो
तुम्हें चुपके से छू लूं तो करामात बने
आग सा तपता सफ़र चांदनी रात बने
उड़ती है दूर दूर ख़ुशी ख्वाब मेरे पहने
इन लम्हों में चली आती है कुछ देर को रहने
तुम जो ठहरो तो बहारों की शुरुआत बने
आग सा तपता सफ़र चांदनी रात बने
ठहरा है गली अपनी, न मुड़ जाए कहीं
वक्त का झोंका कहीं मायूस न उड़ जाए यूंही
थाम लें हाथ जो हम तो ये सौगात बने
आग सा तपता सफ़र चांदनी रात बने
शुरू करो कोई बात, तो कोई बात बने
शुरू करो कोई बात, तो कोई बात बने
