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11 मई 2010

'शायरी का हुनर'




दर्द उसका ओढ़ा हुआ सा लगे
अपना ग़म एक समंदर सा लगे,

बाहर आयी हैं दिल की उलझने सारी
मेरा चेहरा किसी अखब़ार के पन्ने सा लगे,

गुजरते पल में रिश्तों के सही अक्स दिखें
हर बुरा वक़्तआइने सा लगे,

तराशा इसको तो एहसास चुभते हैं सभी,
ये शायरी का हुनर अब किसी घुटन सा लगे,

दर्द उसका ओढ़ा हुआ सा लगे
अपना ग़म किसी समंदर सा लगे,


- योगेश शर्मा