05 अप्रैल 2010

"मैं"

पुनः संपादित एवं प्रकाशित
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मैं से शुरू सारे सवाल,
मैं में छुपे सारे जवाब,
मैं कभी दुनिया से बेहतर,
मैं कभी सबसे ख़राब,

मैं की एक अपनी ही मस्ती,
मैं उम्र भर का नकाब,
मैं गलतियों का पुलिंदा,
मैं फिर भी सबसे लाजवाब,

मैं परेशानी का सबब,
मैं गुनाहों की वजह,
मैं से जुड़े गम सैकड़ो हैं,
मैं तब भी दे कितना मज़ा,

मैं हैवानियत की हद,
मैं अहम् से चूर चूर,
मैं हैरानियों से घिरा,
मैं में है कितना गुरूर,

मैं कभी जीने का मातम,
मैं कभी मरने का डर,
मैं से है सारी ख़ुशी,
मैं जहाँ से बेखबर,

मैं ही मय, मयखाना मैं 
मैं ही साकी, मैं गिलास 
डूबते  मैं के भंवर में
लेकिन बुझे ना मैं की प्यास  


- योगेश शर्मा