13 मई 2010

"पथ के स्वामी"















लक्ष्य दूर,
भले हो कितना,
पथ हो दुष्कर,
चाहे जितना,
फूल बिछे हों, या अंगारे ,
चलना, उतना ही पड़ता है

लाख हों भय,
या हो असमंजस,
थका जिस्म,
या हो उकताहट,
श्रम से, जितना चाहे भागें,
अंत में, बढ़ना ही पड़ता है

लड़ना,
पहले होता है,
अपने से,
फिर कठिनाई से,
ख़ुद को जीता, फिर क्या है,
मंजिल को आना, ही पड़ता है

पाओ इक मंजिल,
फिर दूजी,
दौर, निरंतर चले सदा,
धूप से,
जितना भी झुलसा ले,
सूर्य को, ढलना ही पड़ता है


फूल बिछे हों, या हों पत्थर,
चलना, उतना ही पड़ता है


- योगेश शर्मा