09 मई 2026

'ख़ामोशियों की सरगम'



कोई राग छेड़ते हैं
हँसते हुए से मौसम
मधुर कभी है लगती
ख़ामोशियों की सरगम

नहीं ढूंढता है दिल फिर
कोई दोस्त कोई अपना
ऐसे में बस भला सा
लगता है साथ अपना

समझे न कोई जिसको
वो बात खुद से कहना
कोई दर्द बाँट लेना
या अपने ग़म पे हंसना

किसी गुज़री बात पे बस
हौले से मुस्कुराना
किसी भूली याद पे एक
गीत गुनगुनाना

कभी देखना फ़लक पर
तारों को नाम देना
रिश्ता बना के उनको
कोई पयाम देना

या तकना बादलों से
होके चाँद का गुज़रना
आँचल में रात के फिर 
सुबह का बिखरना

ठंडी हवा के झोंकों
से सांस सांस भरके
धड़कनों को सुनना
पलकों को बंद करके

हर ख्वाब हर हकीकत
थम जाए एक होकर
दुनिया सिमट सी जाए
उस पल में कैद होकर

कोई राग छेड़ते हैं
हँसते हुए से मौसम
मधुर कभी है लगती
ख़ामोशियों की सरगम


- योगेश शर्मा 

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