15 जून 2010

'मसीहा एक आयेगा'




सुना है ग़म जब, हद से गुज़र जायेगा,
सोखने दर्द सबका, मसीहा एक आयेगा,

है उसके इंतज़ार में, कबसे ये क़ायनात ,
दुनिया भी थक चुकी, होती न करामात,

ये उम्मीद झूठी, ख़ुद ब ख़ुद टूटेगी एक दिन,
आसमां को छोड़ ख़ुद पे नज़र, जायेगी एक दिन,

जानेंगे हम ,पहल ये करनी ही होगी तन्हा,
कोई नहीं, हम ख़ुद हैं, अपने ही मसीहा,

जुडेंगे हाथ दूसरे से, बांटने को हर बोझ,
उठेंगे इक इक करके, मसीहा नए, हर रोज़,

दूर होँगे मातम, ख़त्म हर अंधेरा होगा,
वक्त आयेगा, जब हर शख्स मसीहा होगा |



- योगेश शर्मा