15 नवंबर 2010

'वो महज़ फूल नहीं हैं'



बड़े हसीन गवाह हैं, मेरी यादों के
वो महज़  फूल नहीं हैं, मेरी किताबों के

कोई पन्ना नया, जहां कहीं भी जोड़ा था 
वर्क के जैसे, एक फूल रख छोड़ा था

सूख गये लगते पर अन्दर से हरे हैं
कितने हसीन लम्हों की, खुशबू से भरे हैं

कभी आइना बनके दिखाते मेरी झलकी 
तस्वीर  दिखाएँ कभी माज़ी के हर पल की

निशां हैं ये, सभी अधूरे वादों के
हैं साथी कई तन्हाई भरी रातों के

बड़े हसीन गवाह हैं, मेरी यादों के
वो महज़ फूल नहीं हैं, मेरी किताबों के



- योगेश शर्मा