मधुर कभी है लगती
ख़ामोशियों की सरगम
नहीं ढूंढता है तब दिल
कोई दोस्त कोई अपना
ऐसे में बस भला सा
लगता है साथ अपना
जिसको न समझा कोई
वो बात खुद से कहना
कोई दर्द बाँट लेना
और अपने ग़म पे हंसना
किसी गुज़री बात पर
हौले से मुस्कुराना
किसी भूली याद पर
एक गीत गुनगुनाना
यूंही देखना फ़लक पर
तारों को नाम देना
रिश्ते बना के उनसे
कोई पयाम देना
या तकना बादलों से
होके चाँद का गुज़रना
आँचल में रात के फिर
सुबह का बिखरना
ठंडी हवा के झोंकों
से सांस सांस भरके
धड़कनों को सुनना
पलकों को बंद करके
हर ख्वाब हर हकीकत
गुंध जाएँ एक होके
दुनिया सिमट सी जाए
उस पल में कैद होके
कभी राग छेड़ते हैं
हँसते हुए से मौसम
मधुर कभी है लगती
ख़ामोशियों की सरगम
- योगेश शर्मा

अति सुंदर वर्णन
जवाब देंहटाएंBahut hi Shandar hai
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